मनोवैज्ञानिक परामर्श


अपने उपायों से हर व्यक्ति अपने चित्त में निरपेक्ष शांति को लाना चाहता हैं। प्रत्येक व्यक्ति की अपनी-अपनी सोच और अनुभव है। सांख्य में सात्विक, राजसिक, तामसिक विचार तो सर्वमान्य है, लेकिन प्रवृत्तियों का निर्धारण ही हमारा व्यक्तित्व बनाता है। व्यक्तिवादी मानसिकता को समझना ही तो मनोविज्ञान है। सामान्य मन जो चंचल है उसे एकाग्र करने एवं सभी प्रकार के दोषों से रहित कर अपने पूर्ण शुद्ध चेतन स्वरूप में जाग्रत करना ही शिक्षा का मुख्य लक्ष्य है। मनोवैज्ञानिक परामर्श केन्द्र विद्यार्थियों की मौलिक बुद्धिमत्ता को परखने उसे सामाजिक दायित्व के सरोकारों से जोड़ने की अहम इकाई के तौर पर कार्य करेगा । विद्यार्थियों और अभिभावकों के बीच आ रहे महत्वाकांक्षाओं के टकराव को संतुलित करने और शिक्षाविदों/शिक्षकों के नैसर्गिक तालमेल को बढ़ाने के लिए मनोवैज्ञानिक परामर्श केन्द्र सक्रिय भागीदारी निभाने का कार्य करेगा। इस केन्द्र के निम्नलिखित उद्देश्य होंगे-

  • मौलिक क्षमता के विकास करने और आत्मविश्वास को बढ़ाने का कार्य करेगा।
  • मानसिक व्याधियों जैसे- व्यसन, हिंसा, अपराध-बोध और आत्महत्या जैसे प्रकरणों की व्यापक समीक्षा और इसके नियंत्रण के लिए उचित परमर्श देने का कार्य करेगा।
  • पालक, अभिभावक और छात्रों के साथ शिक्षकों के बीच सेतु का कार्य करेगा।
  • छात्र कल्याण से जुड़ी प्रशासनिक और व्यावहारिक गतिविधियों में गति लाने के लिए उत्कृष्ट कार्ययोजना का निर्माण करेगा।