विश्व सभ्यता एवं संस्कृति अध्ययन


विश्वविद्यालय के उद्देश्य 4 (पांच) के अनुरूप गठित यह केन्द्र सभी धर्मों और मुख्य विश्व सभ्यताओं और संस्कृतियों के अध्ययन तथा गवेषणा कार्य को प्रोत्साहित करेगा।

सम्पूर्ण विश्व में अनेक सभ्यता एवं संस्कृतियाँ प्राचीन काल से रही हैं एवं हैं। इस केन्द्र में सभ्यताओं एवं संस्कृतियों के अध्ययन की सार्थकता तभी है, जब उसे वर्तमान भारतीय राष्ट्र, राज्य एवं समाज के परिप्रेक्ष्य में इस प्रकार समझा जाए कि वह राष्ट्रीय जीवन को समृद्ध, पुष्ट एवं सुसंस्कृत बनाने में सहायक हो सके।

अध्ययन सम्बन्धी अनुशासन :

इस दृष्टि से इस केन्द्र के प्रस्तावित अध्ययन सम्बन्धी अनुशासन निम्नलिखित हैं जिनके द्वारा उन संस्कृतियों का अध्ययन, उनके मूलभूत विश्वासों, आदर्शों, मान्यताओं, सिद्धांतों एवं व्यवहार रूपों तथा इतिहास के साथ किया जाएगा -

  • समकालीन विश्व में व्याप्त प्रमुख सभ्यताओें एवं संस्कृतियों का अध्ययन।
  • इंका, मय, एजटेक आदि प्राचीन अमेरिकी सभ्यताओं का अध्ययन।
  • बांटू, गहना, कुश, कृतिजा, अक्सुम, मि, अकन, अग्नि, आशान्ते, माली, लुंडा आदि प्राचीन अफ्रीकी सभ्यताओं का अध्ययन।
  • विविध प्राचीन यूरोपीय सभ्यताओं- स्लाव, हंगार, अवार, मगयार, केल्त, वाइकिंग, रस, जर्मेन, हूण, डेन, सैक्सन, फिन, चेक, रोमन, गाल, कृति, मिनोई, मीसीनी, सर्ब, ब्रितानी, स्काट, आयरिश, बल्गार, प्रशा, हाप्सबर्ग, स्विस, फे्रंक, इतावली, डच, पुर्तगीज आदि सभ्यताओं का अध्ययन।
  • दो प्रबल आधुनिक सभ्यताओं ईसाइयत एवं इस्लाम का विस्तृत अध्ययन।
  • मंगोल, हूण, चीन, यवन, बाबुल, मेसोपोटामिया आदि प्राचीन एशियाई सभ्यताओं का अध्ययन।
  • वैदिक हिन्दू एवं बौद्ध सभ्यता और संस्कृति का अध्ययन।
  • वर्तमान में प्रभावी विविध सभ्यताओं के राजनैतिक लक्ष्यों का वैश्विक सन्दर्भ में अध्ययन।
  • उपरोक्त सभी संदर्भों में भारतीय सभ्यता के लक्ष्यों का अध्ययन।