प्राचीन सभ्यता एवं संस्कृति अध्ययन


विश्वविद्यालय के उद्देश्य 4 (पाँच) के अनुरूप गठित यह केन्द्र सभी धर्मों और मुख्य प्राचीन सभ्यताओं और संस्कृतियों के अध्ययन तथा गवेषणा कार्य को प्रोत्साहित करते हुए प्राचीन भारतीय सभ्यता एवं संस्कृति पर उच्च स्तरीय गवेषणा के लिए शिक्षा का माध्यम बनेगा। जैसा कि विश्वविद्यालय के उद्देश्य में अभिकथित है।

सम्पूर्ण विश्व में अनेक सभ्यताएँ, संस्कृतियाँ प्राचीनकाल से रही हैं एवं हैं। इस केन्द्र में सभ्यताओं एवं संस्कृतियों के अध्ययन की सार्थकता तभी है, जब उसे वर्तमान भारतीय राष्ट्र, राज्य एवं समाज के परिप्रेक्ष्य में इस प्रकार समझा जाए कि वह राष्ट्रीय जीवन को समृद्ध, पुष्ट एवं सुसंस्कृत बनाने में सहायक हो सकें।

शोध एवं शिक्षण कार्य की दृष्टि से इस शिक्षा केन्द्र में अध्ययन एवं गवेषणा के निम्नांकित विषय निर्धारित हैं -

  • प्राचीन भारतीय सभ्यता एवं संस्कृति के दार्शनिक आध्यात्मिक आधार वेद, सांख्य एवं योगदर्शन के विशिष्ट संदर्भों सहित।
  • प्राचीन भारतीय सभ्यता का वेद-प्रतिपादित स्वरूप।
  • प्राचीन भारतीय सभ्यता और बौद्ध धर्म।
  • प्राचीन भारतीय सभ्यता और जैन धर्म।
  • प्राचीन भारतीय सभ्यता-प्रवाह में उभरे नए पंथों का सामान्य स्वरूप एवं विशिष्ट संदर्भ।
  • अपेक्षाकृत नवीन सभ्यताओं एवं संस्कृतियों से भारतीय सभ्यता की अंतः-क्रियाएँ एवं उसमें आए परिवर्तनों का स्वरूप।
  • प्राचीन भारतीय सभ्यता को राज्य का संरक्षणः ऐतिहासिक सन्दर्भ एवं वर्तमान स्थिति।