प्रकोष्ठ


छात्र कल्याण प्रकोष्ठ :

विश्वविद्यालय में छात्रों में व्यक्तित्व व नेतृत्व के सर्वांगीण विकास के लिए छात्र कल्याण प्रकोष्ठ की स्थापना की गई है। जिसके प्रमुख छात्र कल्याण अधिष्ठाता हैं । छात्रों से अपेक्षा रहती है कि वे छात्रावासों के प्रबंधन, खेल, सांस्कृतिक एवं साहित्यिक गतिविधियों, विश्वविद्यालयीन ग्राम विकास योजना, विश्वविद्यालयीन सहजन वृक्ष संरक्षण व संवर्द्धन योजना, पिछड़ी व वंचित बस्ती सेवा कार्य आदि गतिविधियों में भाग लेवें। संदर्भ वर्ष के दौरान निम्न कार्य किए गए ।

  • नये छात्रों के लिए २४॰३॰१४ ई॰ को अभिमुखीकरण कार्यक्रम आयोजित किया गया।
  • विश्वविद्यालय सेवा योजना के अंतर्गत अनेक कार्यक्रम आयोजित किए गए, यथा-विधानसभा शैक्षणिक परिसर की स्वच्छता हेतु विद्यार्थियों द्वारा दो दिवसीय श्रमदान शिविर सम्पन्न हुए।
  • विश्वविद्यालयीन परिवार द्वारा विश्वविद्याला परिसर में छात्र/कर्मचारी/ शिक्षक के जन्मदिन पर वृक्षारोपण/पौधारोपण कर विश्वविद्यालय के प्राकृतिक सौंदर्य को विकसित किया जा रहा है।
  • विश्वविद्यालय ने मुगलियाकोट गांव को विकास की दृष्टि से गोद लिया है। प्रथम बार छात्रों ने उस गांव में जाकर गांव की समस्याओं की जानकारी प्राप्त की।
  • राष्ट्रीय पर्वों 15 अगस्त,2012 एवं 26 जनवरी,2013 पर छात्रों ने सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किए।
  • 14 सितम्बर से 4 अक्टूबर 2012 के बीच हिंदी पखवाड़े के अंतर्गत विभिन्न महाविद्यालयों में भाषण, स्व-रचित कविता पाठ, सस्वर कविता पाठ, निबंध लेखन, कहानी लेखन एवं परिचर्चाओं का आयोजन किया गया।
  • विश्वविद्यालय में एन.एस.एस. एवं एन.सी.सी. की गतिविधियाँ आयोजित करने हेतु संबंधित प्राधिकरणों से स्वीकृति की प्रक्रिया जारी है। इसके अतिरिक्त खेल, विवेकानन्द कैरिअर मार्गदर्शन तथा छात्रों के लिए समूह बीमा योजना के अंतर्गत कार्यवाही की जा रही है। इस प्रकोष्ठ के प्रमुख डॉ.अनिल शिवानी हैं।
  • छात्रों को समय-समय पर भारतीय जीवन मूल्यों, मूल्य आधारित व्यावसायिकता तथा सर्वांगीण विकास के लिए आवश्यक मूल्य यथा- सत्य, ज्ञान, धर्म, दया, शांति, क्षमा, ईमानदारी, अनुशासन, सकारात्मकता, रचनात्मकता, कुशलता आदि की जानकारी देकर व्यवहार में अपनाने का आग्रह किया जाता है।

उत्पीड़न-रोधी(एंटी रेगिंग) प्रकोष्ठ :

अटल बिहारी वाजपेयी हिंदी विश्वविद्यालय, भोपाल ने उच्चतर शिक्षण संस्थाओं में उत्पीड़न-रोधी नियमों को प्रतिपालन करने के लिए उत्पीड़न-रोधी समिति गठित की है जिससे विश्वविद्यालय द्वारा विद्यार्थियों में उत्पीड़न की समस्याओं का समाधान हो सके और इससे उत्पन्न विवादों-प्रताड़नाओं को प्रतिबंधित किया जा सके और रोका जा सके। हिंदी विश्वविद्यालय छात्रों को भयमुक्त शिक्षा देने में समर्थ है तथा उत्पीड़न-रोधी नियमावली बनाकर विश्वविद्यालय के समस्त संस्थानों, संकायों एवं केन्द्रों में अनिवार्यतः पालनीय घोषित किया गया है। विश्वविद्यालय अनुदान आयोग, नई दिल्ली द्वारा प्राप्त उत्पीड़न-रोधी नियमों के पूरी तरह अनुपालन हेतु आवश्यक कदम उठाए गए हैं और इस परिनियमावली के समस्त प्रावधानों के अनुसार नियमावली में निहित समस्त आदेशों के अनुसार उत्पीड़न रोकने एवं उत्पीड़नकर्ताओं को यथा-अपराध दंडित करने के लिए उचित कदम उठाती है।

सर्वोच्च न्यायालय (सुप्रीम कोर्ट) द्वारा गठित कमेटी के निर्णयों के अनुसार ऐसे फलक लगाएं, पत्रक (पंपलेट) बांटें तथा संस्थान के समारोहों में इस विषय का प्रतिपादन करें कि उत्पीड़न के बुरे प्रभाव पड़ते हैं और छात्र लोग इससे बचें, उसकी कड़ाई से अनुपालन किया जाता है।

विश्वविद्यालय अनुदान आयोग की वेबसाइट पर उपलब्ध उत्पीड़न-रोधी फिल्म को विद्यार्थियों में इसका व्यापक प्रचार-प्रसार किया जाता है तथा यहाँ इस फिल्म को छात्रों, शिक्षकों तथा अन्य संबंधित लोगों को भी दिखाने का प्रबंध किया गया है। विद्यार्थियों से उत्पीड़न-रोधी शपथपत्र भी भराया जाता है।

उत्पीड़न-रोधी विश्वविद्यालय पदाधिकारी का नाम, (मोबाइल नं.) तथा अणुडाक (ई-मेल) को (विश्वविद्यालय के वेबस्थल) सार्वजनिक रूप से प्रदर्शित किया गया है जिनसे विश्वविद्यालय स्थान के विद्यार्थी अपनी उत्पीड़न संबंधी शिकायतें देने में समर्थ होते हैं। उत्पीड़न-रोधी विश्वविद्यालय सहायता केन्द्र पीडि़त छात्र की त्वरित मदद करता है और संकटग्रस्त विद्यार्थी का उत्पीड़न संबंधी समस्याओं की सूचना (रिपोर्ट) का संज्ञान लेकर त्वरित कार्यवाही करता है।

महिला प्रकोष्ठ :

कर्म क्षेत्र में महिला प्रकोष्ठ एक अनिवार्यता है। कारण कार्यक्षेत्र में महिलाओं को एक सुरक्षित वातावरण देने में यह प्रकोष्ठ अपनी अत्यंत महत्वपूर्ण एवं निर्णायक भूमिका का निर्वहन करता है। यह प्रकोष्ठ महिलाकर्मी को सुरक्षित मनःस्थिति प्रदान करता है।

विश्वविद्यालय महिलाकर्मी द्वारा किसी भी प्रकार के दुर्व्यवहार का शिकार होने पर प्रकोष्ठ के माध्यम से अपनी वेदना, शिकायत संस्था-प्रमुख तक पहुँचाती है तो उसकी समस्या का सर्वमान्य हल प्रकोष्ठ द्वारा निकाला जाता है।

महिला प्रकोष्ठ महिलाओं के हित में एक सुरक्षित वातावरण को निर्मित करने में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका का निर्वहन करता है। यह प्रकोष्ठ महिलाओं के द्वारा ही संचालित होता है इस कारण पीड़ित महिला बिना किसी संकोच के अपनी मनोव्यथा कहने के लिए प्रस्तुत हो सकती है। महिला प्रकोष्ठ महिलाओं को कार्यस्थल पर न केवल शारीरिक उत्पीड़न, मानसिक उत्पीड़न, छींटाकसी या अन्य किसी भी प्रकार उस व्यवहार के विरुद्ध जो कि उसकी गरिमा को आहत करने वाला होता है, उनके विरुद्ध अपनी बात कहने का और तत्संबंधी समस्या का सम्मानजनक हल ढूँढने में तत्परता से कार्य करता है बल्कि महिला प्रकोष्ठ महिलाओं की गरिमा, शुचिता और आत्म-सम्मान हेतु एक ठोस धरातल प्रदान करता है।

अटल बिहारी वाजपेयी हिंदी विश्वविद्यालय का महिला प्रकोष्ठ अत्यंत प्रभावी रूप से कार्य कर रहा है। महिला प्रकोष्ठ की महती आवश्यकता को देखते हुए इस प्रकोष्ठ को सशक्त किया गया है जिसमें महिलाकर्मियों के लिए सहज सुरक्षा-कवच को बनाया जा सके। विश्वविद्यालय परिवार का सहज और सरल वातावरण होने में अभी तक इसकी जरूरत महसूस नहीं हुई है। इसकी प्रमुख डॉ.रेखा राय हैं।

अभिरक्षा एवं सुरक्षा प्रकोष्ठ :

परिसर सुरक्षा तथा छात्र, शिक्षक एवं कर्मचारियों की सुविधाओं का ध्यान रखने के लिए अभिरक्षा एवं सुरक्षा प्रकोष्ठ की स्थापना की गयी है। इस दृष्टि से विश्वविद्यालय में अभिरक्षक व सुरक्षा प्रहरियों की सेवाएं ली जा रही हैं।