जीव विज्ञान संकाय


इस संकाय के अंतर्गत प्राणिशास्त्र, जैव-विविधता संरक्षण और प्रबंधन , पर्यावरण प्रबंधन के साथ साथ वनस्पतिशास्त्र विभागों का संचालन किया जा रहा है । इन विभागों में स्नातक प्रतिष्ठा (ऑनर्स) स्नातकोत्तर, प्रमाण-पत्र, पत्रोपाधि, एम.फिल और शोध आदि पाठ्यक्रम संचालित हैं। विश्वविद्यालय से किसी भी पाठ्यक्रम को पूर्ण करने वाले छात्र को भाषा, संगणक, योग, समाज सेवा एवं भारतीय जीवन मूल्यों पर आधारित शिक्षण प्रशिक्षण दिया जाएगा। विश्वविद्यालय स्नातक से लेकर शोध के स्तर तक के विभिन्न समसामायिक एवं भारतीय ज्ञान-विज्ञान को प्रदर्शित करने वाले पाठ्यक्रमों को भी इस संकाय के अंतर्गत समाहित करेगा।

जीव विज्ञान विभाग


पाठ्यक्रम का नाम शाखा का नाम अर्हता पाठ्यक्रम की जानकारी
 बी.एस.सी. ऑनर्स  मत्स्य विज्ञान  10+2 हायर सेकेण्डरी जीव विज्ञान + कृषि समूह  छः सेमेस्टर तीन वर्ष

 

प्राणिशास्त्र एवं मत्स्यकी विभाग का परिचय


परिचय:
 
विज्ञान को भारतीय प्राचीन ज्ञान के साथ वर्तमान वैज्ञानिक विकास को हिंदी भाषा में अध्ययन-अध्यापन की दृष्टि से प्राणिशास्त्र एवं मत्स्यकी विभाग की स्थापना सत्र 2014-15 में की गई है।

विज्ञान वह व्यवस्थित ज्ञान या विद्या है जो विचार अवलोकन अध्ययन और प्रयोग से मिलती है जो कि किसी अध्ययन के विषय की प्रकृति या सिद्धांत को जानने के लिये किये जाते हैं। विज्ञान शब्द का प्रयोग ज्ञान की ऐसी शाखा के लिये भी करते हैं जो तथ्य सिद्धान्त औैर तरीकों को प्रयोग और परिकल्पना से स्थापित और व्यवस्थित करती है।

समस्त जीवों (जलचर, नभचर और थलचर) की संरचना का अध्ययन प्राणिशास्त्र का क्षेत्र है। विश्वविद्यालय में प्राणिशास्त्र विभाग की स्थापना का उद्देश्य समस्त प्राणियों के अध्ययन की अधुनातन विधियों, प्रकृतियों के साथ समकालीन पद्धतियों का तुलनात्मक अध्ययन के साथ-साथ प्राकृतिक एवं मनुष्य के द्वारा बनाए गए जल स्त्रोतों का उपयोग एवं संरक्षण करते हुए मत्स्यकी के क्षेत्र में स्वावलम्बी युवा पीढ़ी का निर्माण हो ताकि सामाजिक एवं आर्थिक स्तर में वृद्धि हो सके।

भारतीय अर्थव्यवस्था में मछली पालन एक महत्वपूर्ण व्यवसाय है जिसमें रोजगार एवं स्वरोजगार की अपार संभावनाएं हैं। ग्रामीण विकास एवं अर्थव्यवस्था में मछली पालन की महत्वपूर्ण भूमिका है। मछली पालन के द्वारा रोजगार सृजन तथा आय में वृद्धि की अपार संभावनाएं हैं। ग्रामीण पृष्ठभूमि से जूडे़ हुए लोगों में आमतौर पर आर्थिक एवं सामाजिक रूप से पिछडे़ अनुसूचित जाति अनुसूचित जनजाति व अन्य कमजोर तबके के हैं जिनका जीवन स्तर इस व्यवसाय को बढ़ावा देने से है। मत्स्योद्योग एक महत्वपूर्ण उद्योग के अंतर्गत आता है तथा इस उद्योग को शुरू करने के लिए कम पूंजी की आवश्यकता होती है। इस कारण इस उद्योग को आसानी से शुरू किया जा सकता है। मत्स्योद्योग के विकास से  जहां एक ओर खाद्य समस्या सुधरेगी वहीं दूसरी ओर विदेशी मुद्रा अर्जित होगी जिससे अर्थव्यवस्था में भी सुधार होगा।

शोध के साथ प्राणी विज्ञान शोध प्रबंधन में एम.एस.सी. के प्राथमिक उद्देश्य के लिए विशेष रूप से उन्नत शिक्षा और प्रशिक्षण के साथ छात्रों को प्रदान करने के लिए है, जबकि एक विशिष्ट अनुसंधान घटक की जरूरतों को पूरा करने के लिए आवश्यक है, ताकि छात्रों को प्रयोगात्मक और तकनीकी कौशल और इस तरह के नवाचार के रूप में आवश्यक दक्षताओं में महारत हासिल कर सकता है, निर्णय लेने, रणनीतिक सोच और संगठनात्मक कौशल को बढ़ावा देने की दृष्टि से प्राणिशास्त्र (मत्स्यकी) विभाग कार्य कर रहा है।

मुख्य उद्देश्य:

  1. मत्स्य पालन के माध्यम से जल संरक्षण के कार्य को बढावा देना। 
  2. मछुआरों को प्रशिक्षण के माध्यम से संकटापन्न मत्स्य प्रजातियों की जानकारी देना जिससे विलुप्त होने वाले मत्स्य प्रजापतियों का संरक्षण किया जा सके।
  3. मत्स्य पालन एवं विपणन हेतु नई तकनीक का समावेश करना।
  4. मत्स्य सह-उत्पादों के माध्यम से स्वरोजगार स्थापित करना।
  5. आलंकारिक मत्स्य प्रजातियों की आपूर्ति हेतु इकायों की स्थापना करना।


रोजगार की संभावनाएँ:

  1. मत्स्य आपूर्ति की आवश्यकता को देखते हुए मत्स्य इकाई स्थापित कर स्वयं का रोजगार स्थापित कर सकते हैं।
  2. मत्स्य उद्योगों में अत्यधिक मात्रा में तकनीकी श्रमिक की आवश्यकता है।
  3. शिक्षण संस्थाओं में प्रशिक्षकों की आवश्यकता है।
  4. मत्स्यकी से संबंधित सरकारी उपक्रमों का संचालन विषय-विशेषज्ञों के बिना संभव नहीं है-
    • जिला मत्स्य अधिकारी।
    • मत्स्य अनुसंधान अधिकारी।
    • प्रयोगशाला तकनीशियन।
    • मत्स्य निरीक्षक।

प्रयोगशालाः

विभाग में संचालित पाठ्यक्रम के आधार पर प्रशिक्षण से लेकर शोध विषयों के प्रयोग हेतु आवश्यक उपकरण उपलब्ध हैं, प्रशिक्षण कार्यक्रम के अंतर्गत जलशाला निर्माण एवं प्रबंधन इकाई संचालित है। यहा पर विभिन्न प्रकार की रंगीन मत्स्य प्रजातियों को रखा गया है एवं प्रयोगशाला में जलशाला निर्माण तकनीक संबंधी प्रशिक्षण छात्रों को उपलब्ध कराया जाता है।

   




इसी प्रकार स्नातक, स्नातकोत्तर के छात्र/छात्राओं एवं शोधर्थियों द्वारा लगभग 62 मत्स्य प्रजातियों के नमूनों का एकत्रिकरण प्रयोगशाला में किया गया है।



विभाग में पुस्तकालय एवं सुचना संचार प्रोद्यौगिकी संसाधनः

विभाग में लघु पुस्तकालय के रूप में प्राणिशास्त्र एवं मत्स्यकी की पुस्तकें उपलब्ध है एवं विभाग की आवश्यकताओं को देखते हुए सुचना एवं संचार संसाधन के रूप में विभागीय कार्यालय में आवश्यकतानुरूप कम्प्यूटर, प्रिन्टर स्कैनर एवं इंटरनेट की सुविधा उपलब्ध है।

   


संचालित पाठ्यक्रम:-

प्राणिशास्त्र विषयः

  1. विद्यावारिधि
  2. विद्यानिधि एम.फिल. 01वर्ष
  3. स्नातकोत्तर एम.एस.सी. 02वर्ष
  4. स्नातक (प्रतिष्ठा) बी.एस.सी. 03वर्ष

मत्स्यकी विषय:

  1. स्नातकोत्तर: एम.एफ.एस.सी. (मत्स्य विज्ञान) 02वर्ष
  2. स्नातक - बी.एस.सी. (प्रतिष्ठा) (मत्स्य विज्ञान) 03वर्ष
  3. पत्रोपाधि - मत्स्य एवं मत्स्यकी 01वर्ष
  4. प्रशिक्षण कार्यक्रम - अलंकारिक मत्स्य एवं जलशाला (21दिवसीय)

 

प्रभारी:

डॉ. योगेन्द्र कुमार पयासी
एम.एस.सी. पीएच.डी-प्राणिशास्त्र एफ.एस.एल.एस.सी.
(प्रभारी) प्राणिशास्त्र एवं मत्स्यकी विभाग
मो. 9425182955
ईमेलः This email address is being protected from spambots. You need JavaScript enabled to view it.




जैवविविधता संरक्षण एवं प्रबंधन विभाग


संचालित पाठ्यक्रम

  • स्नातक विज्ञान प्रतिष्ठा (बी.एससी. आनर्स)
  • स्नातकोत्तर विज्ञान (एम.एससी.)
  • विद्यानिधि (एम.फिल.)
  • विद्यावारिधि (पी-एच.डी.)

प्रमाण पत्र

  • जैव विविधता एवं पर्यावरण प्रबंधन

 

पर्यावरण प्रबंधन विभाग 


संचालित पाठ्यक्रम
  • स्नातक विज्ञान प्रतिष्ठा (बी.एस.सी. आनर्स)
  • स्नातकोत्तर विज्ञान (एम.एस.सी.)
  • विद्यानिधि (एम.फिल.)
  • विद्यावारिधि (पी-एच.डी.)

प्रमाण पत्र

  • विकास एवं पर्यावरण
  • जैव विविधता एवं पर्यावरण प्रबंधन

 पत्रोपाधि

  • पर्यावरण एवं मानव स्वास्थ्य

वनस्पतिशास्त्र विभाग

संचालित पाठ्यक्रम

  • स्नातक विज्ञान प्रतिष्ठा (बी.एससी. आनर्स)
  • स्नातकोत्तर विज्ञान (एम.एससी.)
  • विद्यानिधि (एम.फिल.)
  • विद्यावारिधि (पी-एच.डी.)  

स्नातकोत्तर पत्रोपाधि

  • औषधीय पादप विज्ञान