गर्भ संस्कार तपोवन केन्द्र


भारतीय संस्कृति में मानव देह के सृजन से विसर्जन तक 16 संस्कारों का महत्व रहा है। इन संस्कारों के कारण प्राचीन भारत भव्य एंव दिव्य था क्योंकि उस समय भारत में तेजस्वी ऋषियों, मनीषियों, दर्शनिकों तथा उत्तम राजनीतिज्ञों का निर्माण होता था। भारत के उत्तम मनुष्यों की चिंतन धारा से ही हमारी संस्कृति की रचना हुई थी तथा भारत विश्वगुरू सोने की चिड़िया जैसे शब्दों से जाना जाता था। परन्तु सहस्त्राब्दि की गुलामी तथा गत दो शताब्दियों के पाश्चात्य प्रभाव ने भारतीय समाज को इतना प्रभावित किया है कि अधिकांश संस्कारों का सार सिमट कर पुस्तकों तक सीमित रह गया है तथा देश में अनैतिकता, भष्टाचार, आतंकवाद, बलात्कार, भ्रूणहत्या जैसी अनेक बुराइयां बढ़ रही हैं।

भारत को पुनः विश्वगुरू बनाने तथा तेजोमय भारत के पुनर्निर्माण के लिए देश में ऋषियों, महर्षियों, ब्रह्नार्षियों और राजर्षियों का आगमन होना चाहिए जो हमारे ऋषियों द्वारा दिये गए संस्कारों को पुनः अपनाने से ही संभव है। इसलिए भारत के गर्भसंस्कार विज्ञान या अधिजनन शास्त्र को पुनः जागृत करना होगा। अधिजनन शास्त्र इच्छित संतति प्राप्त करने से जननी का तन,मन और ह्नदय शुद्ध एवं पवित्र होता है तथा उसकी कोख से दिव्य आत्मा का अवतरण संभव है। अटल बिहरी वाजपेयी हिंदी विश्वविद्यालय द्वारा भारत की प्राचीन ज्ञान परम्परा के आधार पर गर्भसंस्कार तपोवन केन्द्रों की स्थापना कर उनके माध्यम से माताओं को निःशुल्क गर्भ संस्कार प्रशिक्षण प्रदान करने की योजना है।

गर्भ संस्कार तपोवन केन्द्र की आवश्यकता

भारतीय प्राचीन ज्ञान परम्परा के आधार पर देश में यह एक अनुठा प्रशिक्षण कार्यक्रम है जो गर्भस्थ शिशु से लेकर 18 साल के युवाओं के सर्वागीण विकास हेतु कार्य करेगा।

समाज में हर घर में जन्म लेने वाला प्रत्येक बालक एक अच्छा मनुष्य बने सुसंस्कृत और देशभक्त नागरिक बने यह हमारी राष्ट्रीय आवश्यकता है। अच्छे मनुष्यों का निर्माण किसी भी राष्ट्र के लिए आवश्यक होता है। मनुष्य निर्माण का कार्य माँ के हाथों श्रेष्ठतम रूप से हो सकता है। अतः माता यदि हमारी सांस्कृतिक धरोहर से परिचित है, सतर्क है, सजग है तो उसकी कोख से जन्म लेने वाला बच्चा भी तेजस्वी होगा।

मनुष्य निर्माण का ऐसा विराट लक्ष्य लेकर विश्वविद्यालय ने इस प्रकल्प को योजना का स्वरूप देकर एक पहल की है। केन्द्र के अंतर्गत शोध, शिक्षण, प्रशिक्षण और विस्तारण इन चार आयामों में कार्य होगा।

  1. गर्भशिक्षा, गर्भसंस्कार के माध्यम से तेजस्वी संतति का निर्माण।
  2. वर्तमान में कुछ अंधश्रद्धाओं के स्थान पर वैज्ञानिक सोच का विकास।
  3. कुपोषण निर्मूलन और भ्रूणहत्या निवारण।
  4. परिवारिक संवादहीनता दूर करके स्वस्थ समाज का निर्माण।
  5. अन्ततः उत्तम मनुष्यों के निर्माण से समाज का पुनरूत्थान।

उक्त केन्द्र अक्टूबर, 2014 से संचालित है। इसकी प्रभारी डॉ. रेखा रॉय हैं।