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नियुक्ति निर्धारण


प्रस्तावना: राम चरित मानस में भारतीय अर्थव्यवस्था और व्यक्ति विशेष की कार्य क्षमताओं को परिलक्षित करते हुए तुलसीदासजी ने लिखा है -

विश्व भरण पोषण कर जोई। ताकर नाम भरत अस होई।।

इस उद्धरण को आत्मसात करते हुए अटल बिहारी वाजपेयी हिंदी विष्व विद्यालय भोपाल ने अपने उद्धेष्यों में उच्च तकनीकी षिक्षा हिन्दी माध्यम से देने तथा प्राचीन भारतीय ज्ञान विज्ञान, दर्षन, विचार एवं परंपरा आधारित शोध को प्रेान्नत करने के लक्ष्य को शामिल किया है। इन उद्देष्यों की पूर्ति से हिंदी माध्यम में उच्च शिक्षा प्राप्त व्यावसायिक और पेशेवर मानव संसाधन का सृृजन होगा। यह संसाधक प्रशिक्षु न होकर परिपक्व संसाधक के तौर पर स्थानीय स्तर पर पूरी योग्यता ओर दक्षता से विकास मूलक योगदान देने में सक्षम होंगे। ज्ञान विज्ञान के साथ साथ सामाजिक क्षेत्र में स्थानीय और इतर क्षेत्र के नियोक्ताओं को कुशल सेवा प्रदाता उपलब्ध करवाने और प्रगतिशील उद्यमियों को अवसर प्रदान करने की दिषा में विष्वविद्यालय आगे बढ़ रहा है। नियुक्ति और रोजगार के क्षेत्र में भारत में 16 भारतीय प्रबंधन संस्थान (प्प्ड) उत्कृृष्ट कार्य कर रहें हैं, जो मूलतः पश्चिमी शैली की मानव संसाधन प्रणाली का अनुसरण कर विद्यार्थियों को अंग्रेजी भाषा में अध्ययन, प्रषिक्षण व शोध कराते हंै। इस तरह विद्यार्थियों को महंगी शिक्षा लेना अनिवार्य होता है, साथ ही भारी भरकम वेतन भत्तों के वशीभूत प्रतिभा का पलायन हो जाता है। स्व-अर्थ अन्वेषी प्रकृृति के कारण देश और प्रदेश के स्तर पर चल रही विकासपरक योजनाओं और परियोजनाओं को न योग्य कामगार मिल पाते हैं, और ना ही उस स्तर का वेतन। इस कमी को हिंदी विश्वविद्यालय पूरा करे इस ध्येय से यह प्रस्ताव प्रस्तुत किया जा रहा है ।