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अनुसूचित जाति एवं जनजाति


विश्वविद्यालय एवं संबद्ध संस्थानों में अनुसूचित जाति व अनुसूचित जनजाति के लिए विशेष कक्ष की स्थापना

 

1. परिचयः 


भारतीय समाज में अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति को अत्यंत पिछड़े समुदाय के रूप में चिह्नित किया गया है। इसमें वे सभी जातियाँवर्ग या जनजातियाँ शामिल हैं जिन्हें भारत के संविधान के अनुच्छेद 341व 342के अंतर्गत अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति घोषित किया गया है। अनुसूचित जाति के अंतर्गत वे समुदाय आते हैं जिन्होंने अस्पृश्यता के कलंक का कष्ट भोगा है। अनुसूचित जनजातियाँ सामान्यतः वे हैं जो पहाड़ी एवं वनों के एकांत क्षेत्र में निवासरत होने के कारण आधुनिक सभ्यता व विकास के संपर्क में नहीं रहे या कम रहे हैं।

अनुसूचित जाति देश की कुल जनसंख्या का 15प्रतिशत जबकि अनुसूचित जनजाति 7.5प्रतिशत का निर्माण करता है। अतः यह दोनों वर्ग मिलकर देश की कुल जनसंख्या का 1/5भाग का निर्माण करते हैं। 

जब भारत स्वतंत्र हुआ तब इसने स्वयं को सामाजिक रूप से समान क्रम में लाने का निर्णय किया। जब 1950में देश का संविधान लागू किया गया तब यह महसूस किया गया कि अत्यंत पिछड़े दोनों वर्गों-अनुसूचित जातियों एवं अनुसूचित जनजातियों को विशेष सुरक्षा की आवश्यकता है। संविधान में भेदभाव के सभी प्रकारों को समाप्त कर इन वर्गों को अन्य वर्गों के स्तर तक लाने का प्रावधान किया गया है।

भारत के संविधान में अनुसूचित जाति व अनुसूचित जनजाति के सदस्यों को सेवाओं में आरक्षण प्रदान करने हेतु निम्नलिखित विशेष प्रावधान किये गये हैं

अनुच्छेद 16(4) % सार्वजनिक रोजगार के क्षेत्र में अवसर की समानता इस अनुच्छेद की कोई भी बात,राज्य को किसी भी पिछड़े वर्ग या नागरिक,जो राज्य की सुझाव में राज्य की सेवाओं में समुचित प्रतिनिधित्व नहीं करताकी नियुक्ति या पद में आरक्षण के लिए प्रावधान करने से नहीं रोकता।

अनुच्छेद 335के अनुसार संघ व राज्य से संबंधित प्रशासनिक क्षमता को बढ़ाने के लिए सेवाओं और पदों पर नियुक्ति के लिए अनुसूचित जाति व अनुसूचित जनजाति के दावों को ध्यान में रखा जायेगा।

शासकीय सेवाओं में अनुसूचित जाति व अनुसूचित जनजाति के सदस्यों को आरक्षण प्रदान करने का मुख्य उद्देश्य न केवल उन्हें रोजगार देकर सेवाओं में उनका प्रतिनिधित्व बढ़ाना है अपितु सामाजिक और शैक्षणिक स्तर को उत्कृष्ट कर समाज की मुख्य धारा में उन्हें उनका अधिकारपूर्ण स्थान दिलाना है। 

भारत में उच्च शिक्षा की 10वीं योजना की रूपरेखा के परिच्छेद 10बी2के अंतर्गतः

प्रवेश,नियुक्ति,कर्मचारी आवासों का आवंटन,छात्रावास इत्यदि में आरक्षण नीति का प्रभावी कार्यान्वयन सुनिश्चित करने हेतु विश्वविद्यालय में अनुसूचित जाति/अनुसूचित जन जाति अनुभाग की स्थापना की गई है।

आयोग विश्वविद्यालय को अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति के सदस्यों के लिए विशेष अनुभाग की स्थापना हेतु वित्तीय सहायता उपलब्ध करता है। इस अनुभाग का उद्देश्य विद्यार्थियों के प्रवेश तथा विभिन्न स्तरों पर शैक्षणिक व गैर-शैक्षणिक पदों पर नियुक्ति से संबंधित आरक्षण नीति के क्रियान्वयन में विश्वविद्यालय की सहायता करना है। इस अनुभाग का प्रकार्यअनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति की श्रेणी को विश्वविद्यालय समुदाय की मुख्य धारा में एकीकृत करना तथा उनके द्वारा अनुभव की गई समस्याओं का समाधान करने में उनकी सहायता करना भी है। 9वीं योजना के समाप्त होने तक 109विश्वविद्यालयों में ऐसी अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति के अनुभागों की स्थापना पहले ही हो चुकी है।

2. उद्देश्य:


  1. विश्वविद्यालयों व महाविद्यालयों में अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति के सदस्यों के लिए आरक्षण-नीति का क्रियान्वयन करना।
  2. महाविद्यालयों व संबद्ध महाविद्यालयों में प्रवेश,शैक्षणिक व गैर-शैक्षणिक पदों पर नियुक्ति से संबंधित नीतियों के क्रियान्वयन के आँकड़े एकत्रित करना और एकत्रित आँकड़ों द्वारा प्रदर्शित प्रवृत्ति का विश्लेषण करना और कोटा की आवश्यकता को पूर्ण करने के लिए उसमें परिवर्तन करना।
  3. भारत सरकार और विश्वविद्यालय अनुदान आयोग के द्वारा अधिकथित प्रयोजन हेतु निर्धारित उद्देश्यों एवं लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए निश्चित किए गए मानदंड़ों का अनुकरण करना।
  4. विश्वविद्यालयों व महाविद्यालयों में आरक्षण नीति का निरंतर क्रियान्वयन, निरीक्षण एवं मूल्यांकन करना तथा भारत सरकार के कार्यक्रम व नीतियों के प्रभावी क्रियान्वयन को सुनिश्चित करने हेतु मानदंड़ों की योजना बनाना।

 विशिष्ट अनुभाग के प्रकार्य:

  1. विश्वविद्यालयों व महाविद्यालयों के विभिन्न पाठयक्रमों में निर्धारित तिथि में अनुसूचित जाति व अनुसूचित जनजाति के उम्मीदवारों द्वारा लिए गए प्रवेश से संबंधित सूचना नियमितवार्षिक आधार पर एकत्रित करना और भारत सरकार व आयोग के निर्णयों का परिसंचरण करना तथा आवश्यकता होने पर कार्यवाही करना।
  2.  विश्वविद्यालयों व महाविद्यालयों में उपयुक्त विधि द्वारा निश्चित तिथि में अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति के सदस्य उम्मीदवारों की शैक्षणिक व गैर-शैक्षणिक पदों पर नियुक्ति व प्रशिक्षण संबंधित सूचना एकत्रित करना और भारत सरकार व आयोग के आदेशों का परिसंचरण करना तथा आवश्यकता पड़ने पर निरंतर कार्यवाही करना।
  3. अनुसूचित जाति व अनुसूचित जनजाति के सदस्य उम्मीदवारों की शिक्षा,प्रशिक्षण एवं रोजगार के विविध पहलुओं पर भारत सरकार के आदेशों से संबंधित विवरण व सूचना एकत्रित करना ताकि आयोग नई नीतियाँ बना सके या वर्तमान नीतियों में बदलाव कर सके।
  4. उपर्युक्त एकत्रित सूचना का विश्लेषण करना और विवरण व नीति-संग्रह तैयार करना ताकि इसे मानव संसाधन विकास मंत्रालय/विश्वविद्यालय अनुदान आयोग तथा आवश्यकता पड़ने पर इसी प्रकार अन्य प्राधिकारी को प्रेषित किया जा सके।
  5. विश्वविद्यालय /महाविद्यालय में अनुसूचित जाति व अनुसूचित जनजाति के उम्मीदवार सदस्यों का प्रवेश,नियुक्ति,पदोन्नति एवं इसी प्रकार के अन्य मुद्दों पर उनके प्रतिनिधित्व का प्रबंधन करना।
  6. सम्बद्ध महाविद्यालय व विश्वविद्यालय में यदि स्वीकृत उपचारात्मक प्रशिक्षण योजना का संचालन हो रहा हो तो उसका निरीक्षण करना।
  7. विश्वविद्यालय में अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति के सदस्य विद्यार्थियों व कर्मचारियों की शिकायत के निवारण हेतु एक शिकायत निवारण प्रभाग के रूप में कार्य करना तथा अकादमिक व प्रशासनिक समस्याओं का निराकरण करने में उनकी आवश्यक सहायता प्रदान करना।
  8. विश्वविद्यालय/महाविद्यालय में अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति के सदस्य उम्मीदवारों को विभिन्न पदों पर रोजगार उपलब्ध कराने हेतु रजिस्टर बनाए रखना।
  9. सामाजिक,आर्थिक एवं शिक्षा के अभाव से पीड़ित दोनों समुदायों के मध्य उच्च शिक्षा के प्रचार हेतु समय-समय पर अन्य कार्यक्रम आयोजित करना।
  10. अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति अनुभाग पूर्ण रूप से अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति से संबंधित मुद्दों पर कार्य करता है तथा अन्य कोई कार्य अनुभाग को सौंपा नहीं जाता।
  11. यदि आवश्यक आँकड़े निर्धारित तिथि तक विश्वविद्यालय अनुदान आयोग को उपलब्ध नहीं कराये गए तो विश्वविद्यालय अनुदान आयोग योजनागत या गैर योजनागत अनुदान रोकने का अधिकार सुरक्षित रखता है जब तक कि आवश्यक जानकारी/आँकड़े प्राप्त नहीं हो जाते। अतः विश्वविद्यालय/महाविद्यालयों को सलाह दी जाती है कि वे आवश्यक जानकारियाँ समय पर उपलब्ध कराएँ।


3. पात्रता/लक्षित समूहः


ऐसे विश्वविद्यालय और संबद्ध विश्वविद्यालय को योजना के अंतर्गत वित्तीय सहायता प्रदान की जायेगी जो विश्वविद्यालय अनुदान आयोग अधिनियम 1956के खण्ड 2(एफ) की सीमा के अंदर आते हैं तथा खण्ड 12(बी) के अंतर्गत केंद्रीय सहायता हेतु पात्र हैं। योजना का अभिप्राय केवल अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति के लिए हैं।


4. योजना के अंतर्गत वित्तीय सहायता का स्वरूपः


10वीं योजना की कालावधि के दौरान विश्वविद्यालयों व मान्यता प्राप्त संस्थानों को योजना के अंतर्गत वित्तीय सहायता प्रदान करने हेतु विस्तृत जानकारी निम्नलिखित है

योजना के अंतर्गत उपलब्ध वित्तीय सहायता की प्रकृति:

10वीं योजना के कालखंड में विश्वविद्यालयों व संबद्ध संस्थानों को योजना के अंतर्गत प्रदत्त वित्तीय सहायता निम्नानुसार है

नए अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति प्रभाग की स्थापना हेतु- ऐसे विश्वविद्यालय/संस्थान मान्यता प्राप्त विश्वविद्यालय; जहाँ 9वीं योजना के खत्म होने अर्थात् 31.3.2002तक विशेष प्रभाग की स्थापना नहीं हुई है, नए अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति प्रभाग की स्थापना हेतु विचार किया जायेगा। इस प्रयोजन हेतु आयोग केवल 10वीं योजना के कालखंड समाप्ति तक निम्नलिखित वित्तीय सहायता प्रदान करेगा।

एक बार

कंप्यूटर एवं प्रिंटर: रू 50,000/-

आवर्तक: (i)निम्नलिखित तालिका में उल्लिखित पद के लिए कर्मचारियों के वेतन, वास्तविक व्यय के अनुसारः

 

क्र.

पद के नाम

पदों की संख्या

1

सह प्राध्यापक के वेतनमान में समन्वयक श्रेणी I / उप कुलसचिव राज्य/ केंद्रीय विश्वविद्यालय के लिए तथा व्याख्याता के वेतनमान में समन्वयक श्रेणी ।। /मानित विश्वविद्यालयों के लिए सहायक कुलसचिव

1

2

अधिकारी के समतुल्य प्रशासनिक सहायक

1

3

अनुसंधान-कम-सांख्यिकी अधिकारी

1

4

स्टेनो कंप्यूटर ज्ञान के साथ/ डाटा एन्ट्री आपरेटर

1

5

भृत्य

1

कुल

5

 उपर्युक्त पदों के लिए वेतन व भत्ते संबंधित विश्वविद्यालय में समतुल्य पदों के अनुसार दिया जायेगा।

योजना के अंतर्गत सृजित पदों के लिए विश्वविद्यालय अनुदान आयोग की सहायता नियुक्ति-तिथि का विचार किए बिना केवल 10वीं योजना के कालखंड समाप्ति अर्थात् 31मार्च 2007तक उपलब्ध होगी। अतः विश्वविद्यालय अनुदान आयोग से कर्मचारियों के वेतन हेतु सहायता के दावे के लिए विश्वविद्यालय को चाहिए कि वे पदों पर नियुक्ति हेतु विश्वविद्यालय अनुदान आयोग द्वारा जारी दिशा-निर्देशों का पालन करें तथा स्वीकृत पदों को विश्वविद्यालय अनुदान आयोग द्वारा अनुमोदन के एक वर्ष के भीतर भर लिया जाए।विश्वविद्यालय अनुदान आयोग की सहायता के निष्कासन के लिए यह एक आवश्यक स्थिति है कि 10वीं योजना के कालखंड के अंतर्गत पदों के निर्वाह के लिए कार्यकारी परिषद के प्रस्ताव पर आधारित राज्य सरकार/या संबद्ध विश्वविद्यालय के अधीन सहमति पत्र की प्रतिलिपि विश्वविद्यालय द्वारा विश्वविद्यालय अनुदान आयोग को प्रस्तुत की जाती है।

केंद्रीय विश्वविद्यालयों व विश्वविद्यालय अनुदान आयोग से संबद्ध विश्वविद्यालय जिन्हें 100प्रतिशत निर्वाह अनुदान प्राप्त है,को इस प्रकार के सहमति पत्र की आवश्यकता नहीं है।

आकस्मिकताएँ: रू 1.00लाख प्रति वर्ष

  1. क्षेत्र कार्य हेतु यात्रा भत्ता/दैनिक भत्ता 
  2. आँकड़े संकलन 
  3. सांख्यिकी आँकड़ों का विश्लेषण व मूल्यांकन 

9वीं योजना के कालखंड समाप्ति तक स्थापित विशेष प्रभाग को 10वीं योजना के कालखंड में जारी रखने हेतु वित्तीय सहायता अंतिम चार योजना कालखंडों के दौरान विश्वविद्यालयों व संबद्ध विश्वविद्यालयों को आरक्षण नीति के कार्यान्वयन के लिए विशेष प्रभाग की स्थापना हेतु आयोग पहले ही वित्तीय सहायता प्रदान कर चुका है। कुछ ऐसे भी विशेष प्रभाग हैं,जिन्होंने इस क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य किए हैं। इन विशेष प्रभागों की सहायता से योजना कालखंड की समाप्ति तक साहित्य की आवर्ती समाप्त हो जायेगी। विश्वविद्यालयों व संबद्ध महाविद्यालयों में आरक्षण-नीति के कार्यान्वयन की निरंतरता को बनाए रखने हेतु आयोग द्वारा रू 1,00,000/ प्रतिवर्ष की दर से निम्नलिखित मदों के लिए सहायता प्रदान की जायेंगी -

  1. क्षेत्र कार्य हेतु यात्रा भत्ता दैनिक भत्ता
  2. आँकड़े संकलन
  3. सांख्यिकी आँकड़ों का विश्लेषण एवं मूल्यांकन
  4. कंप्यूटर व प्रिंटर (योजना-कालखंड में एक बार)

यह वित्तीय सहायता दसवीं योजना कालखंड के अंत तक होगी। अनुसूचित जाति/ अनुसूचित जनजाति प्रभागों द्वारा लिये गए उत्तरदायित्वों की समीक्षा दसवीं योजना के अंत की जायेगी।

5. योजना हेतु आवेदन करने की प्रक्रिया:


 आयोग योजना के प्रारंभ में संस्थानों से विहित प्रारूप (अनुच्छेद-I) के अनुसार प्रस्ताव आमंत्रित करेगा।

6. विश्वविद्यालय अनुदान आयोग द्वारा अनुमोदन हेतु प्रक्रिया- विश्वविद्यालयों व मान्यता प्राप्त विश्वविद्यालयों से प्राप्त प्रस्तावों की संवीक्षा प्रयोजन हेतु गठित समिति की सहायता से की जायेगी।

7. विश्वविद्यालय अनुदान आयोग द्वारा अनुदान देने हेतु प्रक्रिया -

आयोग विश्वविद्यालयों से अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति प्रभागों की स्थापना हेतु स्वीकृति के लिए संपर्क करेगा तथा कर्मचारियों के वेतन और आकस्मिकता हेतु गैर-आवर्ती अनुदान की पहली किस्त देगा। द्वितीय वर्ष और उसके बाद के वर्षों के लिए अनुदान तभी दिया जायेगा जब आयोग को अंतिम वषों में लिये गए दायित्वों के कार्यों के ब्यौरों के साथ-साथ व्यय विवरण (अनुच्छेदक-IV) एवं उपयोग प्रमाणपत्र (अनुच्छेदक V) प्राप्त हों। लेखा-परीक्षण पूर्ण होने के पश्चात् व्यय का लेखा परीक्षित कथन शीघ्र ही भेज दिया जायेगा।

योजना के लिए स्वीकृत पदों के कर्मचारियों के वेतन हेतु विश्वविद्यालय अनुदान आयोग से अनुदान की माँग करने के लिए विश्वविद्यालय को चाहिए कि नियुक्तियों के पश्चात् शीघ्र ही विश्वविद्यालय अनुदान आयोग को निम्न सूचनाएँ प्रेषित करें :

  1. राज्य सरकार या विश्वविद्यालय यह आश्वासन दें कि आयोग की सहायता बंद होने के पश्चात् उक्त पद के वेतन के प्रति दायित्व का वहन स्वयं करेंगे।
  2. नियुक्त व्यक्ति का नाम
  3. शैक्षणिक अर्हता और अनुभव
  4. पदाधिकारी द्वारा उक्त पद पर नियुक्ति से पूर्व ग्रहित पद तथा उस संस्थान का नाम जहाँ वह कार्य कर रहा/रही था/थी।
  5. नए पद ग्रहण करने की तिथि।
  6. चयन समिति का लिखित ब्यौरा।
  7. वेतन मानंदड पर आधारित भत्तों सहित प्रस्तावित मासिक वेतन का विवरण।
  8. वित्तीय वर्ष के अंत तक देय राशि।
  9. वेतन वृद्धियों की संख्या, यदि कोई देय हो।
  10. नियुक्त व्यक्ति वही विश्वविद्यालय से संबंधित होने की स्थिति मेंअंतिम रिक्त पद को भरने हेतु यदि कोई कार्यवाही की गई हो।
  11. विश्वविद्यालय के नियमों में उल्लिखित प्रक्रिया व मानदंडों के अनुसार की गई नियुक्ति नियोजन का एक प्रमाणपत्र (अनुच्छेदक- VI)
  12. योजना की प्रगति की निगरानी हेतु प्रक्रिया-

प्रत्येक शैक्षणिक सत्र के अंत में समन्वयक/विशेष प्रभाग का प्रभारी कुलसचिव के माध्यम से संपर्क अधिकारी द्वारा यथावत प्रतिहस्ताक्षरित मूल्यांकित प्रतिवेदन विश्वविद्यालय अनुदान आयोग को प्रस्तुत करेगा,जिसमें आँकड़ों का समेकित विवरण,प्रभाग द्वारा प्राप्त उपलब्धि एवं विद्यमान कठिनायों का स्पष्ट उल्लेख हो। प्रतिवेदन में नीति के क्रियान्वयन हेतु प्रभाग द्वारा की गई कार्यवाही चिह्नांकित होनी चाहिए। विश्वविद्यालय में आरक्षण नीति के कार्यान्वयन के लिए प्रतिवेदन में प्रवेशों में प्रतिशत,शैक्षणिक व गैर-शैक्षणिक कर्मचारियों की नियुक्तियाँ,कर्मचारियों को आवास-आवंटन,छात्रावास में कमरों को विश्लेषण के साथ दर्शित किया जाना चाहिए।

विश्वविद्यालयीन स्तर की परामर्शी समिति:

विश्वविद्यालय के अनुसूचित जाति व अनुसूचित जनजाति हेतु आरक्षण-नीति की नीतियों और कार्यक्रमों का प्रभावी कार्यान्वयन के लिए प्राध्यापक की श्रेणी के ‘संपर्क अधिकारी’को नियुक्त किया जाना चाहिए,जिस प्रभाग के अधीन है। स्थाई समिति के अध्यक्ष के रूप में कुलपति को रखा जा सकता है। समिति में संपर्क-अधिकारी,विभागों के प्रमुख 2-3,संकाय-सदस्य 2-3 (प्राध्यापक,सह-प्राध्यापक एवं व्याख्याता स्तर के), विश्वविद्यालय से संबंधित स्नातक/ स्नातकोत्तर के महाविद्यालयों के प्राचार्य 3-4एवं सदस्य-सचिव के रूप में अनुसूचित जाति / अनुसूचित जनजाति प्रभाग के समन्वयक को समाहित किया जायेगा।

इन सदस्यों में से कुछ अनुसूचित जाति / अनुसूचित जनजाति श्रेणियों के होने चाहिए। समिति द्वारा एक वर्ष में दो बार वार्ता आयोजित की जाना चाहिए जिससे स्थिति का पुनरावलोकन और समस्याओं का समाधान किया जा सके। आरक्षण-नीति के कार्यान्वयन से संबंधित कार्य उपर्युक्त उल्लिखित समिति के देखरेख में किये जा सकते हैं।

आयोग ने विश्वविद्यालय और नामित विश्वविद्यालय में आरक्षण-नीति के कार्यान्वयन को संपूर्ण रूप से देखने हेतु अनुसूचित जाति / अनुसूचित जनजाति की स्थाई समिति को संवैधानित किया है। अनुसूचित जाति / अनुसूचित जनजाति की स्थाई समिति विश्वविद्यालयों को भेंट देती रहेगी और अनुसूचित जाति / अनुसूचित जनजाति प्रभागों के कार्यों का पुनरावलोकन और मुआवज़ा करती रहेगी।